Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
रक्तमांसमयो देहो मनो नष्टं विचारणात् ।
जडाश्चित्तादयः सर्वे कुतोऽहंभावभावना ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ को ही प्रकारान्तर से विस्तारपूर्वक कहते हैं।
देह रक्तमांसमय है, मन विचार से नष्ट हो चुका और चित्त आदि सब जड़ हैं। फिर देह में अहंभावना
कैसे हो ?