Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
गुणा गुणार्थे वर्तन्ते प्रकृतौ प्रकृतिः स्थिता ।
सदेव सति विश्रान्तं कुतोऽहंभावभावना ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्व आदि गुण गुणों के प्रकाश, प्रवृत्ति और मोहरूप अपने व्यापार में स्थित हैं,
प्रकृति (प्रधाननाम की माया ) गुणसाम्यावस्थारूप स्वभाव में स्थित है और सत् (ब्रह्म) स्वात्मभूत
सत्स्वभाव में विश्रान्त हे, अतः अहंभावना कैसे और किसको हो ?