Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
आत्मनो व्यतिरेकेण न किंचिदपि विद्यते ।
सर्वं ब्रह्मेति मे तत्त्वमेतत्तद्भावयाम्यहम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा से
अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, सब ब्रह्म ही है, इस प्रकार का मेरा अनुभव सिद्ध जो सत्त्व है, उसकी मैं
भावना करता हूँ