Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
समूलं संपरित्यज्य चिरायाहंकृतिभ्रमम् ।
तिष्ठाम्यात्मनि शान्तात्मा शरत्खं शरदीव खे ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
चिरकाल से आरूढ हुए अहंकार भ्रम का समूल
परित्याग कर शान्तात्मा हुआ मे जैसे शरत् काल का आकाश अपने निर्मल स्वभाव में स्थित रहता है
वैसे ही निर्मल आत्मा में स्थित हूँ