Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
एते मनःशरीरे हि मिथः पीवरतां गते ।
जडरूपे हि वपुषा पयोदसरसी यथा ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे शरीर से जलरूप मेघ और तालाब परस्पर एक
दूसरे से पुष्टि को प्राप्त होते हैं, वैसे ही शरीर से जड़रूप ये मन और शरीर परस्पर के अनुग्रह से पुष्टि
को प्राप्त हुए हैं