Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इति निर्णीय ततया धिया धवलया मुनिः ।
बद्धपद्मासनस्तस्थावर्धोन्मीलितलोचनः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, विशुद्ध तथा विशाल बुद्धि से इस प्रकार निर्णय कर
पद्मासन लगाकर और नेत्रों को आधे मीच कर मुनि बैठ गये
सर्ग सन्दर्भ
तिरपनवाँ सर्ग समाप्त चौवनवाँ चौवनवाँ सर्ग जलाने, जलप्लावन आदि द्वारा अपने शरीर में विष्णु शरीर की भावना कर रहे उद्दालक मुनि का विकल्पों को हटाकर समाधि में विश्राम लेना ।