Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
निमिमील दृशावर्धं परिपक्ष्मलपक्ष्मके ।
निस्पन्दतारामधुरे संध्याकाल इवाम्बुजे ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार अति शीघ्रता से बह रहे जल को पुल अर्थात् बाँध रोक देता है उसी प्रकार उन्होंने गृह, पुत्र,
मित्र आदि क्षुद्र विषयो में भागते हुए उन्मत्त व्याकुल मन को विवेकबल से निर्मल बनाकर रोक दिया ॥ ३ १॥
जिस प्रकार संध्याकाल निश्चल आँख की पुतली के सदृश भ्रमरों से युक्त कमलों को संकुचित कर देता
है उसी प्रकार उन्होने निश्चल पुतलियों से मनोहर एवं दोनों पलकों के मिलने से सघन केशों से युक्त
पक्ष्मोवाले नेत्रो को आधा मीच लिया