Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
तमस्युपरते कान्तं तेजःपुञ्जं ददर्श सः ।
शार्वरे तिमिरे शान्ते प्रातःसंध्यामिवाम्बुजम् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे रात्रि सम्बन्धी अन्धकार के शान्त हो जाने पर कमल उदित हो रहे सूर्य से युक्त प्रातः सन्ध्या को
देखता हे, वैसे ही उद्दालक ने तमोगुणरूपी अन्धकार के शान्त हो जाने पर मनोहर तेज के समूह को
देखा अर्थात् उन्हें सत्त्वगुण के अनुरूप तेजःपुंज का भ्रम हुआ