Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

पयोद इव तापिच्छं नीहारमिव मारुतः । दीपस्तम इवाच्छात्म तदप्याशु ममार्ज सः ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार मेघ तमाल पुष्प को, वायु कुहरे को ओर दीपक अन्धकार को नष्ट कर देता है उसी प्रकार मुनि ने स्वच्छ स्वभाववाले आकाश में देखे हुए नाना रूपों को भी नष्ट कर दिया