Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
तत्र प्रापदथानन्दं दृश्यदर्शनवर्जितम् ।
अनन्तमुत्तमास्वादं रसायनमिवार्णवम् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर अमृत के गृहस्वरूप
समुद्र की नाई उद्दालक ने बाह्य प्रपंच के दर्शन से रहित होकर ब्रह्मादि उत्तम प्रकृतिवालों से आस्वादित
निरतिशय आनन्द वहाँ प्राप्त किया