Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तपदं तत्तद्यावत्संप्राप्तवान्द्विजः ।
तत्र सिद्धाः सुराः साध्याः स्थिता ब्रह्महरादयः ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
जब सर्वोत्कृष्ट सप्तम भूमिका में स्थिति रूप
जीवन्मुक्तपद को प्राप्त हुए तब वहाँ उनके पास सिद्ध, सुर, गणदेवता, ब्रह्मा, महादेव आदि सब
उपस्थित रहे