Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 86
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 86 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तः स च मुनिर्विजहार यथासुखम् ।
यावदिच्छं वनान्तेषु मुनीनामाश्रमेषु च ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्त वह मुनि वनों में और मुनियों के आश्रमों में सुखपूर्वक यथेच्छ विहार करते
रहे