Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 89
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 89 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 89
संस्कृत श्लोक
कदाचिदह्ना मासेन कदाचिद्वत्सरेण च ।
कदाचिद्वत्सरौघेण ध्यानासक्तो व्यबुध्यत ॥ ८९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय से उद्दालक
द्विज पर्वतों की भीतर की गुफाओं में ध्यानरूपी लीला से परमपद प्राप्ति पूर्वक रहने लगे ॥ ८ ८॥ समाधि
में बैठे हुए मुनि कभी एक दिन में, कभी एक महीने में, कभी एक वर्ष में और कभी कई वर्षो में समाधि से
जागते थे