Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
वृत्तिमच्चित्तमत्तस्य विजनानि वनान्यपि ।
नगराणि महालोकपूर्णानि परवीरहन् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे शत्रुतापन, राग आदि वृत्तिवाले चित्त से मत्त हुए पुरुष के लिए निर्जन वन भी प्रचुर लोगों से
संकीर्णं नगर हैं