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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

ईहितानीहिते क्षीणे यस्यान्तर्वितताकृतेः । सर्वे भावाः समा यस्य स समाहित उच्यते ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस विस्तृत स्वरूप के अन्दर राग-द्वेष क्षीण हो चुके हों और जिसके लिएसब भाव समान हैं वह समाहित कहा जाता है