Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
द्यौः क्षमा वायुराकाशं पर्वताः सरितो दिशः ।
अन्तःकरणतत्त्वस्य भागा बहिरिव स्थिताः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
द्युलोक, पृथिवी, वायु, आकाश, पर्वत, नदियाँ ओर दिशाएँ
अन्तःकरण तत्त्व के बाहरी भागों के तुल्य स्थित हैं