Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
रज्ज्वां सर्पभ्रमे शान्तेऽहिर्नेति निर्वृतिर्यथा ।
अहंत्वभावसंशान्तौ तथान्तः समता मता ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
वैसे ही अहन्ता की शान्ति होने पर चित्त में सर्वदुःख वैषम्यशून्यतारूप समता प्राप्त होती हे