Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
कैलासपादारण्यानां रुद्राक्षैस्तरुगुल्मकैः ।
वसन्ति घूकवत्क्षुद्रास्ते वै निकटजीविनः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कैलास पर्वत के नीचे पर्वतो के अरण्यों में उत्पन्न होनेवाले रुद्राक्ष ओर अन्यान्य वृक्षों के फल, पुष्प,
कन्दमूल आदि से वे क्षुद्र किरात अपना जीवन व्यतीत करने के कारण उल्लू के समान निकट-जीवी
होकर रहते थे