Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
मनोबुद्धीन्द्रियाद्यन्तो भूतकोशश्चलद्वपुः ।
नाहमेवं शरीरादि शिष्टमालोकयाम्यहम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका स्वरूप अति चपल है, ऐसा शरीर से लेकर मन, बुद्धि,
इन्द्रिय आदि तक जो स्थूल-सूक्ष्म भूतों का समूह है, वह भी में उक्त रीत से नहीं हूँ। अब जो कुछ बचा
है उसे भी देखकर विचारता हू