Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
चिच्छक्तिरमला सैषा चेत्यामयविवर्जिता ।
भरिताशेषदिक्कुञ्जा भैरवाकारधारिणी ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार की यह चितिशक्ति समस्त मलों से परे हैं, विषयों के आमय से (बीमारी से)
वर्जित है, समस्त दिशाओं के मण्डलों को परिपूर्ण यानी व्याप्त कर लेनेवाली है और अज्ञानियों के भय
की हेतु होने से भयंकर आकार धारण करनेवाली है