Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 6, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
ततोऽसौ गुणसंपूर्णो गुरुमेवानुगच्छति ।
स तमेवं विवेके वै नियोजयति पावने ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार गुणों की सम्पत्ति होने पर गुरुमुख से श्रवण में अधिकार होता है। अपक्व चित्तवाले
पुरुषों का गुरुमुख से श्रवण में अधिकार नहीं है, ऐसा कहते हैं।
तदनन्तर गुणों से परिपूर्ण वह जीवन्मुक्त पुरुष गुरु का ही अनुगमन करता हे । गुरु उसे आत्मतत्त्व
एवं अनात्मतत्त्व के विवेक में उपायों का उपदेश देकर अपनी बुद्धि से भी मननरूप पवित्र कार्य में प्रवृत्त
करता हे