Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 6, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
पौरुषीं तनुमाश्रित्य केचिदेतत्क्रियारताः ।
स्वर्गान्नरकमायान्ति स्वर्गं च नरकात्पुनः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्मफलो मे आसक्ति होने के कारण ही अज्ञानियों को अनर्थ की प्राप्ति होती है, ऐसा दिखलाते हैं ।
मनुष्य शरीर को पाकर भी कोई मूढ अनासक्ति से कर्मानुष्ठानरूप इस क्रिया में रत नहीं होते, वे
कामात्मा पुरुष स्वर्ग का भोग करके नरक में जाते हैं और नरक से फिर स्वर्ग में आते हैं