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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 60, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति हेमजटाधीशो लेभे पदमनुत्तमम् । विवेकाध्यवसायेन ब्राह्मण्यमिव गाधिजः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, जैसे विश्वामित्र ने अपने तपोबल से ब्रह्मत्व प्राप्त किया था, वैसे ही उक्त प्रकार से हेमजट नामक भीलों के राजा सुरघु ने विवेक के अध्यवसाय से (निश्चयात्मक ज्ञान से) परमपद को प्राप्त किया

सर्ग सन्दर्भ

उनसठवाँ सर्ग समाप्त साठवाँ सर्ग जीवन्मुक्त उस सुरघु के देह विनाशपर्यन्त असंगरूप से आचरण तथा देह विनाश के बाद आकाश के समान अवस्थान का वर्णन |