Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
निराधिव्याधयो धीराः कच्चित्संपन्नशालयः ।
जनतास्तव देशेषु तिष्ठन्ति विगतज्वरम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सौभाग्यसम्पनन राजन्,
सुप्रसन्न एवं गंभीर समदुष्टि से क्या आप समस्त जनों के हित के साधन अवश्य कर्तव्य कर्मो को करते
हँ २।३१॥ राजन्, शारीरिक और मानसिक पीडाओं से रहित, धीर तथा धन-धान्यों से सम्पन्न जनता
समस्त चिन्ताओं से निर्मुक्त होकर क्या आपके देश में निवास करती है ?