Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
त्वमहं च व्यपोह्येति दूरे दूरदशासु च ।
अद्य संघटितौ भूयः किमसाध्यमहो विधेः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रियवर, विधि ने
इस प्रकार आप ओर हमलोग दोनों को देशतः अत्यन्त दूर तथा कालतः भी अधिक समय तक अलग
रखकर आज फिर संघटित किया हे । अहो, भला बतलाइये विधि के लिए क्या असाध्य है ?