Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
सर्वाः संपत्तयोऽस्माकं राजर्षे संस्थिताः पुरे ।
भवदागमनेनाद्य प्रयाताः शतशाखताम् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
राजर्षि, नगर में अवस्थित हम लोगों की सम्पूर्ण सम्पत्तियाँ आज
आपके शुभागमन से चारों ओर फलोन्मुखता को प्राप्त हो गई