Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 62, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
निश्चिन्ताधिगताभीष्टा हेयोपादेयवर्जिता ।
प्रोक्ता समाधिशब्देन परिपूर्णा मनोगतिः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्ता से वर्जित, अभीष्ट पदार्थ
को प्राप्त हेय ओर उपादेय से रहित तथा परिपूर्ण जो मानसिक वृत्ति है, वह समाधि शब्द से कही
गई हे