Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
परिघ उवाच ।
राजन्नूनं प्रबुद्धोऽसि प्राप्तवानसि तत्पदम् ।
संशीतलान्तःकरणः पूर्णेन्दुरिव राजसे ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
परिघ ने कहा : राजन्, आप निश्चितरूप से तत्त्व को जान चुके हैं और उस उत्तम परम पद की
प्राप्ति भी कर चुके हैं, अत्यन्त शीतल अन्तःकरण से युक्त होने के कारण आप ऐसे सुशोभित (प्रकाशित)
हो रहे हैं, जैसे कि शीतलात्मा परिपूर्ण चन्द्रमा
सर्ग सन्दर्भ
बासठवाँ सर्ग समाप्त तिरसठवाँ सर्ग राजा परिघ के द्वारा परीक्षण के अनन्तर जिसकी स्तुति की गई है, ऐसे तत्त्ववित् सुरघु का अपनी सजग स्थिति का सविस्तार वर्णन |