Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तत्त्वावलोकनात्क्षीणे चित्ते नो जायते पुनः ।
जीवः कदाचन तदा भवेत्तीर्णभवार्णवः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
उद्धार कर चुकने पर जीव के फिर कीचड़ में फंसने की शंका का निवारण करते है ।
हे रघुवीर, तत्त्वसाक्षात्कार से चित्त के क्षीण हो जाने पर जीव संसार में फिर कभी भी जन्म-ग्रहण
नहीं करता और वह चित्त की क्षयदशा में ही संसार-सागर से पार हो जाता है