Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
मनोमात्रेण सुहृदा सदैव सहवासिना ।
सह किंचित्परामृश्य भवत्यात्मा समृद्धृतः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
तब कौन उपकार करता है, इस प्रश्न पर कहते हैं।
सदा सर्वदा ही साथ रहनेवाले विशुद्धमनरूपी मित्र के साथ कुछ परामर्श करने से आत्मा संसार
सागर से पार हो जाता है