Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अभ्रनीलांशुकच्छन्ना मूकरत्नविभूषणाः ।
शिलाः कनकसुन्दर्यो यत्र श्रृङ्गाभिसारिकाः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उप पर्वत में जिन्होंने मेघरूपी नील वस्त्रों का
परिधान किया है ओर मूक रत्नों को धारण करने से अत्यन्त शोभित हो रही है, ऐसी सुवर्णमयी शिलारूपी
सुन्दरियाँ शिखररूपी पुरुषों का आलिंगन करने के कारण अभिसारिकाएँ बनी हुई हे