Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 215
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 215 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 215
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हिन्दी अर्थ
जैसे भीतरी सम्बन्ध का (अहन्ता के अध्यास का) अभाव होने के कारण काष्ठों के पतनों से
जल पीड़ित नहीं होता, वैसे ही देह आदि के अध्यासों से शून्य आत्मा शारीरिक दुःखों से पीड़ित नहीं
होता