Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 35
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हिन्दी अर्थ
मछली के सदृश एक दूसरे के अंगों को
निगल रहे, जडता से जर्जर तथा भ्रमग्रस्त ये जनसमूह आकाश में शीर्ण शुष्क पत्ते के समान जो भ्रमण
कर रहे हैं, वह भी संसक्ति का प्रताप है