Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
न भ्रूमध्ये न नासान्ते न मुखे न च तारके ।
नान्धकारे न चाभासे न चास्मिन्हृदयाम्बरे ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
बन्धन हेतु आसक्ति की विरोधिनी असंग स्थिति का लक्षण कहते हैं।
श्रीरामजी, यह दिखाई दे रहा समस्त प्रपंच आत्मस्वरूप है, इसलिए मैं उसमें से किसको चाहूँ और
किसको छोड़ दूँ, इस प्रकार की परिपक्व विचारणा से जनित जीवन्मुक्त के शरीर की जो अवस्था है,
उसे आप असंग-स्थिति जानिए