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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

न चले न स्थिरे नादौ न मध्ये नेतरत्र च । न दूरे नान्तिके नाग्रे न पदार्थे न चात्मनि ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, जो अपने सर्वकर्मत्याग की यत्र तत्र बडाई नहीं करता, जो फल के उद्देश्य से कर्मो मेँ अभिनिवेश नहीं करता, जो फल की सिद्धि और असिद्धि में सदा एक-सा रहता है ओर जो ईश्वरार्पण बुद्धि से कर्मफलों का परित्याग कर देता है, वही पुरुष असंसक्त कहलाता है