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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 7, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 7, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

नभःफलनिपाताभज्ञानसंप्रतिपत्तये । तत्रेमं श्रृणु वृत्तान्तं प्राक्तनं कथयामि ते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

दूसरे क्रम में जनक की आख्यायिका का दृष्टान्त देनेवाले श्रीवसिष्ठजी भूमिका बधते है। उक्त क्रम में आकाश से फल गिरने के तुल्य ज्ञानप्राप्ति के लिए इस प्राचीन वृत्तान्त को आप सुनिये, मैं आपसे कहता हूँ