Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 70, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
जाग्रत्येव सुषुप्तस्थो जीवो भवति राघव ।
अस्यां दृशि गतोऽद्वन्द्वो नित्यानस्तमयोदयः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश मेघो के साथ तनिक भी सम्बन्ध प्राप्त
नहीं करता वैसे ही अपने स्वरूप मेँ निरत जीव, क्रियाओं का (विहित या निषिद्ध कर्मो का) अनुष्ठान
करे चाहे न करे, पर क्रियाजनित फलों के यानी स्वर्ग, नरक आदि के साथ तनिक भी सम्बन्ध प्राप्त नहीं
करता