Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 70, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
आत्मध्यानमयोऽध्याने प्रबोधं परमात्मनः ।
कलनामलनिर्मुक्तः स्वसक्त इति कथ्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
निश्चल बुद्धि की साक्षिभूता चिति में केवल विश्रान्ति
कर परिपूर्णं भूमानन्द से युक्त अतएव सर्वत्र दृश्य पदार्थो मेँ नीरस-सा होकर अवस्थित होड्ये