Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आत्मेति व्यवहारार्थमभिधा कल्पिता विभोः ।
नामरूपादिभेदस्तु दूरमस्मादलं गतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, उक्त सुषुप्त-
दशा को प्राप्त होकर जी रहा तथा व्यवहार कर रहा पुरुष सुख-दुःखरूपी रस्सों से कभी भी आकृष्ट
नहीं होता