Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रस्यात्मनो देहसंबन्ध इति या कथा ।
सैषा दुरवबोधार्था दावाग्नौ जलधिर्यथा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
सुषुप्ति की विकारशून्य अवस्था को प्राप्त
कर ओर अपने चित्त मे समस्त वासनाओं से रहित होकर ज्ञानी भीतर से ऐसी शीतलता को प्राप्त
करता है जैसे चन्द्रमा अमृत से अपने भीतर शीतलता को प्राप्त करता है