Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
स्पन्दमायाति वातेन भूतैर्वा पीवरीकृतः ।
देहस्तेन न संबन्धो मनागेव सहात्मना ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे क्रियाओं में उसकी निर्विकारता है, वैसे ही मरण और जीवन में भी उसकी निर्विकारता है, इस
आशय से कहते हैं।
हे श्रीरामजी पूर्वोक्त निर्विकार सुषुप्त अवस्था में स्थित होकर तथा समस्त चित्तविक्षेप आदि
पापों से निर्मुक्त होकर इस शरीर को गिरा दीजिए अथवा पर्वत के समान भीतर से निष्कम्प होकर
दीर्घकाल तक उसको धारण कीजिये