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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

ज्ञातवानसि तत्सत्यं बुद्धवानसि तत्पदम् । प्राप्तवानसि रूपं स्वं विशोको भव भूतये ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञान की परिपक्व अवस्था के उत्कर्ष से आत्मसक्ति्मे भी क्रमशः उत्कर्षे बढ़ता जाता है ओर तदनुसार संग भी क्षीण होता जाता है, यह कहते हैं। केवल आत्मा में विश्रान्त होने से ही जीव संसार में असंगभाव को प्राप्त करता हे । केवल आत्मा के ज्ञान से ही विषयसंग क्षीणता को प्राप्त होता है, दूसरे किसी प्रकार से नहीं