Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
उत्पन्न पदार्थों के स्थावर-विभाग में हेतु बतलाते हैं।
जैसे समुद्र का जल चंचल तरंगों में स्पन्दात्मा होकर अवस्थित रहता है, वैसे ही आत्मा चित्त
से उत्पन्न उन पदार्थों में कहीं-कहीं पर केवल स्पन्दरूपात्मा होकर अवस्थित रहता है