Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
संस्थितः स हि सर्वत्र त्रिषु कालेषु भास्करः ।
सूक्ष्मत्वात्सुमहत्त्वाच्च केवलं न विभाव्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर प्रबोधकालमें ही मन के द्वारा सम्पादित भूताश्लेष से विनिर्मुक्त होकर अपने देह को उस
प्रकार देखता है, जिस प्रकार कि वायु के कन्धे पर चढ़े हुए देव आदि भूमण्डल को देखते हैं