Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिदात्मा सर्वगो व्यापी न क्वचिन्नाम संस्थितः ।
यद्वत्सर्वपदार्थानां सत्ता तद्वन्महेश्वरः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार समुद्र में तरंगरूपी कणों के कललोलों से असीम जल प्रस्पन्दित होता है उसी प्रकार आत्मा
ही समस्त वस्तुओं से मानों उदित हुए विश्व के रूप से प्रस्पन्दित होता है