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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

यावत्प्रबोधो विमलो नोदितस्तावदेव सः । मौर्ख्याद्दीनतया राम भक्त्या मोक्षोभिवाञ्छ्यते ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

दृश्य ओर दर्शन के सम्बन्ध से होनेवाली जो अखण्ड पूर्णानन्द स्फुरण-स्वरूप दृश्य और दर्शन से वर्जित सुखानुभूति होती है, उसका अवलम्बन करने से संसार की अनुत्पत्ति होती हे