Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पादपे पल्लवश्रेणीं चालयत्यनिलो यथा ।
तथैवाङ्गावलीं वायुर्देहे संचालयत्यलम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अब आप इन तीनों अहंकारो को भी छोडकर जो अवशिष्ट
रहनेवाला अहंभावनाशून्य पूर्ण चित्स्वभाव है, उसका अवलम्बन कर उसी अवलम्बन योग्य वस्तु में
निरत होकर अवस्थित रहिए