Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्रतिबिम्बितसर्वार्था केवलं स्वात्मनि स्थिता ।
प्रकाशयति बोधेन जगन्तीमानि दीपवत् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
युक्ति, शास्त्र ओर गुरुवचन ये तो केवल दिशामात्र का सूचन करने के लिए हैं, उसका परिचय तो
केवल अपने अनुभव से ही होता है, इस आशय से कहते है।
हे तत्त्वज्ञश्रेष्ठ, अपने ही अनुभव से शीघ्र देखिये कि आप सदा-सर्वदा उदित स्वभाव तत्-पदलक्ष्य
परब्रह्म स्वरूप ही है अतः आप देह आदि की वासनाओं से युक्त अहंकार तादात्म्याध्यास का परित्याग
कर दीजिये