Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
धारयत्यवनीं शेषः करोत्यर्को दिनावलीम् ।
यमो यमत्वं कुरुते जीवन्मुक्ततयैव हि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, अपने हृदय से इच्छाओं के परिवारभूत देहाभिमान आदि का निश्चितरूप से
परिहार हो जाने पर पुरुष चन्द्रमा की नाई सौन्दर्य से परिपूर्ण हो जाता है और अत्यन्त प्रसन्नता को
प्राप्त करता है