Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
केचिद्राज्येषु तिष्ठन्ति च्छत्रचामरपालिताः ।
यथा जनकशर्यातिमान्धातृसगरादयः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे अचल मेरु स्थिरता और धीरता को ग्रहण करता है, वैसे ही अचल
तत्त्ववेत्ता स्थिरता और धीरता को ग्रहण करता है यानी न तो किन्हीं विषयों से हर्षित होता है और न
भयस्थानों से प्रकम्पित होता है । ईंधनों के शान्त हो जाने पर अग्नि की नाई अति स्वच्छ कान्ति से
विराजित होता है